वैज्ञानिकों ने बीमारियों का पता लगाने के लिए बाल से भी 2000 गुना पतला चिमटा बनाया
लंदन के इम्पीरियल कॉलेज के वैज्ञानिकों ने ऐसा ‘चिमटा’ बनाया है, जिसकी मदद से बीमारियों का पता आसानी से लगाया जा सकेगा। यह चिमटा इंसानों के बाल की मोटाई से भी 2 हजार गुना ज्यादा पतला है। इसकी मदद से सर्जरी के दौरान शरीर के किसी हिस्से को ज्यादा काटने की जरूरत भी नहीं होगी। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस चिमटे की मदद से बीमारी वाली कोशिकाओं की और गहराई से स्टडी की जा सकेगी। इसके साथ ही गंभीर बीमारियों का ट्रीटमेंट भी और बेहतर तरीके से किया जा सकेगा। चिमटे की मोटाई सिर्फ 50 नैनोमीटर है। एक नैनोमीटर एक मिलीमीटर का 10 लाखवां हिस्सा होता है, जबकि इंसान के बाल की मोटाई 1 लाख नैनोमीटर तक हो सकती है।
ग्लास रॉड से बना है चिमटा
चिमटे को एक ग्लास रॉड से बनाया गया है, जिसमें ग्रेफाइट की तरह ही कार्बन-बेस्ड दो इलेक्ट्रोड हैं। कोशिका के अंदर मौजूद हिस्से को निकालने के लिए इसे जिंदा कोशिकाओं में डाला जा सकता है।
वैज्ञानिक इस चिमटे का इस्तेमाल डीएनए या माइटोकॉन्ड्रिया को सस्पेंड करने में भी कर सकते हैं। इसके साथ ही बेहद पतला होने की वजह से बिना कोशिकाओं को नष्ट किए भी संक्रमित हिस्सों को निकाला जा सकता है।
डीएनए को समझने में भी मदद मिलेगी
रिसर्चर डॉ. एलेक्स इवानोव ने बताया कि ‘यह चिमटा कोशिकाओं और उसके हिस्से को अलग-अलग करने में एक टूल साबित होगा। हम जिंदा कोशिकाओं को समझकर उसके मॉलिक्यूल्स को अलग-अलग कर सकते हैं।' उन्होंने बताया कि इसकी मदद से लोगों के डीएनए को भी जांच सकते हैं ताकि संभावित बीमारियों का पता पहले ही लगाया जा सके।
इंजीनियरों ने एक ऐसी 'रोबोटिक आर्म' बनाई है, जो लोगों को खाना खिलाने में मदद करेगी। इस रोबोटिक आर्म को वैज्ञानिकों ने 'आर्म-ए-डाइन' नाम दिया है। इंजीनियरों के मुताबिक, इसको किसी भी व्यक्ति के सीने पर लगाया जा सकता है। यह खाना भी खिला सकती है। फिलहाल ये सिर्फ प्रोटोटाइप है और इसे लोगों को खाना खिलाने के लिए ही डिजाइन किया गया है। इस रोबोटिक आर्म को ऑस्ट्रेलिया की आरएमआईटी यूनिवर्सिटी और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी डिजाइन की एक्सर्सन गेम लैब में बनाया गया है।
इसे बनाने वाले इंजीनियरों ने बताया कि यह रोबोटिक आर्म लोगों के खाना खाने के एक्सपीरियंस को बदल देगी और लोग इसका इस्तेमाल तीसरे हाथ की तरह कर सकते हैं। ये रोबोटिक आर्म एक बार में दो लोगों को खाना खिला सकती है।
ग्लास रॉड से बना है चिमटा
चिमटे को एक ग्लास रॉड से बनाया गया है, जिसमें ग्रेफाइट की तरह ही कार्बन-बेस्ड दो इलेक्ट्रोड हैं। कोशिका के अंदर मौजूद हिस्से को निकालने के लिए इसे जिंदा कोशिकाओं में डाला जा सकता है।
वैज्ञानिक इस चिमटे का इस्तेमाल डीएनए या माइटोकॉन्ड्रिया को सस्पेंड करने में भी कर सकते हैं। इसके साथ ही बेहद पतला होने की वजह से बिना कोशिकाओं को नष्ट किए भी संक्रमित हिस्सों को निकाला जा सकता है।
डीएनए को समझने में भी मदद मिलेगी
रिसर्चर डॉ. एलेक्स इवानोव ने बताया कि ‘यह चिमटा कोशिकाओं और उसके हिस्से को अलग-अलग करने में एक टूल साबित होगा। हम जिंदा कोशिकाओं को समझकर उसके मॉलिक्यूल्स को अलग-अलग कर सकते हैं।' उन्होंने बताया कि इसकी मदद से लोगों के डीएनए को भी जांच सकते हैं ताकि संभावित बीमारियों का पता पहले ही लगाया जा सके।
इंजीनियरों ने एक ऐसी 'रोबोटिक आर्म' बनाई है, जो लोगों को खाना खिलाने में मदद करेगी। इस रोबोटिक आर्म को वैज्ञानिकों ने 'आर्म-ए-डाइन' नाम दिया है। इंजीनियरों के मुताबिक, इसको किसी भी व्यक्ति के सीने पर लगाया जा सकता है। यह खाना भी खिला सकती है। फिलहाल ये सिर्फ प्रोटोटाइप है और इसे लोगों को खाना खिलाने के लिए ही डिजाइन किया गया है। इस रोबोटिक आर्म को ऑस्ट्रेलिया की आरएमआईटी यूनिवर्सिटी और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी डिजाइन की एक्सर्सन गेम लैब में बनाया गया है।
इसे बनाने वाले इंजीनियरों ने बताया कि यह रोबोटिक आर्म लोगों के खाना खाने के एक्सपीरियंस को बदल देगी और लोग इसका इस्तेमाल तीसरे हाथ की तरह कर सकते हैं। ये रोबोटिक आर्म एक बार में दो लोगों को खाना खिला सकती है।
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